वन विभाग चौकी की सहभागिता से खूब फल फूल रहा है जड़ी बूटियों का गोरखधंधा

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वन विभाग चौकी की सहभागिता से खूब फल फूल रहा है जड़ी बूटियों का गोरखधंधा
आखिर बनकर्मियों द्वारा जड़ी बूटियों से लदी पिकअप पर पकड़ने के बाद कैसे छोड़ दी गई
बन बिभाग के कर्मचारियों ही करा रहे है जड़ी बूटियां का गोरख धंदा
(ललितपुर)जहां एक और पूरे देश एवं प्रदेश में शांति एवं अपराधिक कार्यों पर अंकुश लगाने हेतु योगी सरकार भरसक प्रयास रत है। वही  कुछ अराजक तत्व एवं कुछ सरकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध कारोबार का गोरखधंधा बड़ी ही मात्रा में फल फूल रहा है। कस्वा जाखलौन में बल्लू साहू के नेतृत्व में लाखों रुपए की जड़ी-बूटी बैठी जा रही है आज जड़ी बूटियों से भरा हुआ  पिकअप को  जाखलौन चौकी इंचार्ज के नेतृत्व में पकड़ा गया था  लेकिन  मिली जानकारी के अनुसार  10000 की  सुविधा शुल्क लेकर  उसे छोड़ दिया गया  इससे यह स्पष्ट होता है  वन विभाग  के द्वारा ही  जड़ी बूटियों का गोरखधंधा  चरम पर फल फूल फल फूल फूल रहा है गौरतलब हो कि कस्बा जाखलौन में इन दिनों जड़ी बूटियों का अवैध कारोबार बड़ी संख्या में फल-फूल रहा है। जब वन विभाग के आला अधिकारी डीएफओ से संवाददाता ने संपर्क साधने की कोशिश की तो डीएफओ महोदय ने फोन तक तक उठाना मुनासिब नहीं समझा वही जब उनके आवास पर जाकर इस मामले से रूबरू होना चाहा तो योगी के अधिकारी ने मिलने से मना कर दिया और किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर दिया इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गोरखधंधा वन विभाग के द्वारा ही कराया जा रहा है जो कि जरूरत जरूरत पड़ने पर किसी गरीब को किसी मुकदमे में लाद सकते हैं और अपना बचाव कर सकते हैं लेकिन आज हुए इस बाती ने यह स्पष्ट कर दिया है की जड़ी बूटियों का गोरखधंधा वन विभाग ही करा ही करा विभाग ही करा ही करा वन विभाग ही करा ही करा विभाग ही करा का गोरखधंधा वन विभाग ही करा ही करा विभाग ही करा ही करा वन विभाग ही करा ही करा विभाग ही करा रहा है। ऐसा नहीं है कर्मचारी ही इसमें स्थल लिप्त लिप्त हो अधिकारी भी संलिप्त हैं क्योंकि घने घने जंगल रेगिस्तान में तब्दील हो चुके हैं जिससे वन कर्मियों एवं बल के के अधिकारियों को मोटी मोटी कमाई होती है इससे दिनदहाड़े जंगलों को साफ कराया जा रहा है आखिर किस बात के लिए योगी इन अधिकारी एवं कर्मचारियों कर्मचारियों को ललितपुर जिला में तैनात किए हुए हैं जब वही लोग जंगलों को रेगिस्तान बनाने पर तुले हुए हैं जिसमें वन विभाग के कर्मचारी एवं पुलिस विभाग सहयोग एवं सुरक्षा मुहैया कराती है। कस्बा जाखलौन में इस प्रकार के गोरखधंधे बड़े अरसे से ही चले आ रहे हैं ।ऐसा नहीं है कि सरकारी तंत्र को इसकी जानकारी ना हो मिली जानकारी के अनुसार इन गोरखधंधा वालों  की दुकान दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि की ओर है। इसका जिम्मा सबसे ज्यादा वन विभाग  के कर्मियों को जाता है ।वन विभाग के कर्मचारी सरकार की तनखा तो पाते हैं, लेकिन वफादारी माफियाओं की करते हैं ।कस्बा जाखलौन से सटे जंगलों से बड़ी संख्या में जड़ी बूटियां की खेप एकदम दबंग बयक्ति अवैध तरीके से सप्लाई करता है । जिसकी  खरीदारी जाखलौन के एक दबंग व्यक्ति द्वारा कि जाती है। और वह दिनदहाड़े अपनी पिक अप में भरकर में भरकर अप में भरकर में भरकर आगे सप्लाई करने के लिए ले जाता है इससे सरकारी तंत्र बेखबर है इससे स्पष्ट होता है कि माफिया को सरकारी तंत्र का पूरा सहयोग प्राप्त है पूरा सहयोग प्राप्त है। उसे ना तो किसी प्रकार का डर है ना भय है मानो ऐसा लगता है कि उसका कोई भी कुछ बिगाड़ ही नहीं सकता ,सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी माफिया को दौर दौर हावी हो चला है ।वन विभाग के कर्मचारी रोटी तो सरकार खाते है,लेकिन दलाली माफियाओं की करते है।और तो और माफियाओं को पल-पल की खबर  वन विभाग के सरकारी कर्मचारियों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। और उसी हिसाब से माफ़िया अपने कार्यक्रम को सेट करते है। योगी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए एक तरफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा रही हैं ।वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर बसे हुए गांव पर मौजूद कर्मचारी पूरी तरह से सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे है। मानो ऐसा प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं जब हरे भरे घने जंगल एक दिन वीरान नजर नजर घने जंगल एक दिन वीरान नजर नजर दिन वीरान नजर आएंगे ,और वीरान करने वाले कोई और नहीं सरकारी कर्मचारी है । विभाग के कर्मचारी इतनी लापरवाह हो चुके लापरवाह लापरवाह हो चुके हैं कि ना तो वह अपनी तो वह अपनी तैनाती को ध्यान देते हैं ना ही जंगल की सुरक्षा के लिए कभी भी कोई कदम नहीं उठाते और तो और अगर किसी गरीब व्यक्ति सुखी लकड़ी करते मिल करते मिल लकड़ी करते मिल करते मिल जाए तो उससे भी 100 ₹200 या किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ प्राप्त कर लेते हैं। भ्रष्टाचार नसों में बसा हुआ है ,वह अपने भ्रष्टाचार कमाई को भ्रष्टाचार कमाई को बेतन मानते  हैं ।और शासन एवं एवं जनता के प्रति उदासीन होकर माफियाओं को संरक्षण देते हैं। शासन द्वारा कई तरह की योजनाएं लागू करके शासन की मंशा ओं को को जनता के सामने लाने के लिए सरकार गंभीर है । लेकिन यहां सरकार के मंसूबों के विपरीत उलट कार्य किया जा रहा है। जब हमारी टीम इस क्षेत्र में जड़ी बूटियों को लेकर को लेकर भ्रमण पर निकली तो पाया कई बोरो में भरी हुई जड़ी बूटियां जो कि सीधे तौर पर सप्लाई की जा रही है।बह जड़ी बूटी एक माफिया के यहां उपलब्ध मिली। सरकार द्वारा ऐसे माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करके घने एवं हरे-भरे जंगलों को बचाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए।
इनका कहना है
जब दूरभास हमारे संवाददाता ने बात की तो उनका कहना था कि 10000 की सुविधा शुल्क लेकर पिकअप को छोड़ दिया गया और स्टाफ ज्यादा होने के लिए सभी के हिस्सेदारी उसमें मौजूद थी
जाखलौन बन चौकी इंचार्ज श्रीवास्तव

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