जिला सहकारी बैंक जाखलौन में हुआ हजारों हजारों का घोटाला

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जिला सहकारी बैंक जाखलौन में हुआ हजारों हजारों का घोटाला
पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत हुए लोन में में बैंक कर्मियों द्वारा हुई हेरा फेरी
जांच करने पर परत दर परत होंगे घोटाले को उजागर
जाखलौन (ललितपुर) शासन द्वारा  2010 के दौरान पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत किसानों के लिए लोन उपलब्ध कराए गए थे। जिससे कि किसान अपनी रोजी-रोटी को सुचारू रूप से चला सके से चला सके रूप से चला सके से चला सके रूप से चला सके से चला सके वही कस्बा जाखलौन में भी जिला सहकारी बैंक में भी इस प्रकार के लोन किए गए थे। लेकिन ताजा जानकारी के अनुसार उस समय हुए लोन मैं बड़ी संख्या में अनियमितताएं सामने आ रही है इससे स्पष्ट होता है ,कि उस समय के लोन में में बड़ा ही घोटाला पर है है। आज इसी की छानबीन करने के लिए हमारे संवाददाता प्रद्युम्न तिवारी ने बैंक में जाकर इस मामले की जानकारी लेनी चाही। जिसमें गोकुल नामदेव नाम की एक उपभोक्ता की पासबुक को लेकर जब बैंक कर्मियों से जानकारी मांगी ,तो जानकारी देने की बजाय यहां-वहां की बातें करते नजर आए करते नजर आए । वही पासबुक के हिसाब से देखा जाए तो उपभोक्ता ने 25000 का लोन लोन जिला सहकारी बैंक के द्वारा लिया था । जोकि 2010 का था। लेकिन समय के साथ साथ धीरे-धीरे उपभोक्ता अपने लोन को भरता गया गया। और पूरा लोन फाइनेंस होने पर उसने पासबुक को भी अपने पास रखा। लेकिन 8-2 2013 में उसने जो 6067 का लोन किया था बो कालम कर्मचारियो द्वारा गोल कर दी गयी। जो कि सीधे-सीधे बैंक कर्मियों के घोटाले की पोल खोलने के लिए काफी है । उस समय उपभोक्ता ने 6067 रुपए की एफडी की थी । उपभोक्ता की पासबुक पर कोई भी एंट्री नहीं की गई और उस एफडी का पैसा का पैसा भी बैंक वालों ने देने के लिए मना कर दिया। जानकारी करने पर बैंक कर्मियों की माने तो वह पैसा उसी लोन में जमा कर दिया गया था। लेकिन ऐसा कहीं कुछ नहीं मिलता कि वह पैसा लोन में जमा हुआ हो ।अगर पूरी परतों को खोला जाए तो जिला सहकारी बैंक जाखलौन द्वारा हजारों का गोलमाल नजर आएगा। वहीं उपभोक्ता द्वारा कई बार आरोप लगाने के बाद भी  विभागीय कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई अमल में ना हो पाने के चलते हौसले बुलंद है । वहीं इस तरह के घोटालों ने उपभोक्ताओं को परेशान करके रखा है ।उपभोक्ता अपने ही पैसे को लेने के लिए तरस रहे हैं। बैंक कर्मी मालामाल है। कर्मचारियों द्वारा जब ऐसे मामलों के बारे में जानकारी मांगी जाती है तो वह किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर देते है। उपभोक्ताओं द्वारा कई बार हो रहे इस प्रकार की घोटालों की आवाज उठाई इस प्रकार की घोटालों की आवाज उठाई घोटालों की आवाज उठाई। लेकिन कहीं शासन के दबाव में या किसी न किसी दबाव बस उनकी आवाज को दबा दिया जाता दिया जाता को दबा दिया जाता किसी दबाव बस उनकी आवाज को दबा दिया जाता दिया जाता को दबा दिया जाता उनकी आवाज को दबा दिया जाता दिया जाता है । और इतिश्री कर दिया जाता है ।गौरतलब हो कि मामला कस्बा जाखलौन से जुड़ा हुआ है। जहां पर गोकुलनामदेव द्वारा 25000 का लोन लेने एवं उसको फाइनल करने के बाद जो करतूत बैंक कर्मियों की सामने आई वह एक बड़े घोटाले की तरफ इशारा इशारा इशारा कर रही हैं। ऐसे ही ना जाने कितनी भोली भाली जनता जनता भाली जनता जनता को छलावा करते हुए बैंक कर्मियों ने अपने वारे-नारे किए हुए हैं। शासन से 2010 में हुई लोन की जांच करने हेतु मांग की गई है एवं दोस्ती बैंक एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की मांग की गई की गई।

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