प्रद्युमन तिवारी पत्रकार के बारे में जाने
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प्रद्युम्न तिवारी : पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम मानकर उठाई आम आदमी की आवाज
देवगढ़ की धरती से पत्रकारिता की शुरुआत, ग्रामीण और जनसरोकारों के मुद्दों को प्रमुखता देने वाले पत्रकार एवं संपादक
विशेष प्रोफाइल
बुंदेलखंड की धरती संघर्ष, संवेदना और सामाजिक सरोकारों की धरती मानी जाती है। यहां पत्रकारिता केवल घटनाओं को दर्ज करने का माध्यम नहीं, बल्कि गांव-कस्बों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और आम आदमी की आवाज को मजबूती देने का जरिया भी है। इसी सोच के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय प्रद्युम्न तिवारी ने पिछले एक दशक से अधिक समय में स्थानीय समस्याओं और जनहित के मुद्दों को अपनी पत्रकारिता का केंद्र बनाया है। देवगढ़, ललितपुर से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले प्रद्युम्न तिवारी वर्तमान में ‘बुंदेलखंड खंड की आवाज’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उनकी पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने खबर को केवल सूचना तक सीमित न रखते हुए उसे जनसमस्या से जोड़ने का प्रयास किया। बिजली, पानी, आवास, प्रशासनिक लापरवाही, आदिवासी समुदाय की समस्याएं, ग्रामीण विकास और स्थानीय निकाय से जुड़े मुद्दे उनकी पत्रकारिता के प्रमुख विषय रहे हैं।
देवगढ़ से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
प्रद्युम्न तिवारी का जन्म 6 फरवरी 1988 को ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी देवगढ़, जनपद ललितपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। देवगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और ग्रामीण परिवेश ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। यही कारण है कि आगे चलकर उनकी पत्रकारिता में स्थानीय समाज, गांव और आम नागरिकों से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिला।
उन्होंने एमए पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की। पत्रकारिता को पेशे के रूप में अपनाने का निर्णय उन्होंने वर्ष 2014 में लिया। इसी वर्ष उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत ‘दैनिक जनप्रिय’ से की। शुरुआती दौर में समाचार संकलन, स्थानीय घटनाओं की रिपोर्टिंग और जनसमस्याओं को समाचार के रूप में प्रस्तुत करने का अनुभव प्राप्त किया।
पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर केवल बड़े आयोजनों या राजनीतिक गतिविधियों से सामने नहीं आती, बल्कि गांव और कस्बों की छोटी-छोटी समस्याएं भी समाज की बड़ी तस्वीर प्रस्तुत करती हैं।
जनसेवा को पत्रकारिता का उद्देश्य बनाया
प्रद्युम्न तिवारी पत्रकारिता को केवल रोजगार या पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते हैं। उनका स्पष्ट उद्देश्य उन समस्याओं को उठाना है, जिनसे आम आदमी प्रतिदिन जूझता है।
उनका मानना है कि जब किसी गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी, महिला, वृद्ध या जरूरतमंद व्यक्ति की समस्या समाचार के माध्यम से सामने आती है तो पत्रकारिता की सार्थकता सिद्ध होती है।
इसी सोच के चलते उन्होंने स्थानीय स्तर पर ऐसे अनेक मुद्दों को उठाया, जिनका सीधा संबंध आम नागरिक के जीवन से था। उनकी रिपोर्टिंग में बिजली, पानी, सरकारी योजनाओं, आवास, पेंशन, प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण विकास जैसे विषय लगातार दिखाई देते रहे हैं।
जाखलौन के विद्युत सब स्टेशन की मांग को उठाया
प्रद्युम्न तिवारी की प्रमुख जनसरोकार वाली खबरों में जाखलौन में 33 केवी विद्युत सब स्टेशन बनवाने की मांग महत्वपूर्ण रही। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण रही है। जाखलौन क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्या को उन्होंने समाचारों के माध्यम से प्रमुखता से उठाया और 33 केवी सब स्टेशन की आवश्यकता को सामने रखा।
इस मुद्दे को लगातार उठाए जाने के बाद जाखलौन में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण हुआ, जिसे वह अपनी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनाते हैं।
यह उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि स्थानीय पत्रकारिता केवल समस्या प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहती। यदि किसी जनसमस्या को लगातार और तथ्यात्मक रूप से उठाया जाए तो वह शासन-प्रशासन के स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर सकती है।
देवगढ़ की पेयजल समस्या को आवाज
देवगढ़ क्षेत्र में पेयजल की समस्या भी प्रद्युम्न तिवारी की पत्रकारिता के प्रमुख विषयों में रही। गर्मी और जलसंकट के समय आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को उन्होंने समाचारों के माध्यम से सामने रखा।
पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े इस मुद्दे को लगातार उठाने का परिणाम यह रहा कि देवगढ़ की पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में कार्य हुआ। इसे भी वह अपनी पत्रकारिता की उपलब्धियों में शामिल करते हैं।
उनका मानना है कि पत्रकारिता की असली सफलता तब है जब किसी खबर से किसी व्यक्ति या समुदाय की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आए।
जाखलौन को नगर पंचायत बनाने की मांग
जाखलौन क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों में जाखलौन को नगर पंचायत बनाने की मांग भी उनकी पत्रकारिता का हिस्सा रही। स्थानीय क्षेत्र के विकास, प्रशासनिक सुविधाओं और नागरिक आवश्यकताओं को देखते हुए नगर पंचायत की मांग को उन्होंने सार्वजनिक विमर्श का विषय बनाया।
ऐसे मुद्दे स्थानीय पत्रकारिता की पहचान होते हैं, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव क्षेत्र के विकास और नागरिक सुविधाओं पर पड़ता है।
गरीब और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता
प्रद्युम्न तिवारी की पत्रकारिता का एक महत्वपूर्ण पक्ष समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की समस्याओं को सामने लाना रहा है। उनके अनुसार, कई बार सरकारी योजनाएं कागजों पर मौजूद होती हैं, लेकिन पात्र व्यक्ति जानकारी या प्रक्रिया के अभाव में उनका लाभ नहीं उठा पाते।
उन्होंने गरीब परिवारों के आवास से जुड़े मामलों को भी उठाया। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया।
पत्रकारिता के दौरान उन्होंने शहरिया आदिवासी समुदाय के अनेक लोगों की समस्याओं को भी प्रमुखता दी। उनके अनुसार, कई लोगों के आधार कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन जैसे कार्यों में मदद की गई। यह पहल पत्रकारिता की उस सामाजिक भूमिका को दर्शाती है, जिसमें पत्रकार केवल खबर प्रकाशित करने वाला व्यक्ति नहीं रहता, बल्कि समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नागरिक की भूमिका भी निभाता है।
पुलिस विभाग में लापरवाही के मुद्दे भी उठाए
पत्रकारिता में प्रशासन और पुलिस से जुड़े विषय भी महत्वपूर्ण होते हैं। प्रद्युम्न तिवारी ने पुलिस विभाग में हो रही कथित लापरवाही से जुड़े मुद्दों को भी समाचारों के माध्यम से उठाया।
उनका प्रयास रहा कि यदि किसी व्यक्ति को पुलिस या प्रशासनिक स्तर पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो उसकी बात सामने आए और संबंधित विभाग तक पहुंचे।
हालांकि ऐसे मामलों में पत्रकारिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तथ्य और दोनों पक्षों को सामने रखना होती है। प्रद्युम्न तिवारी के अनुसार, जनसमस्याओं को उठाते समय उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और पीड़ित की आवाज को सामने लाना है।
पांच मासूमों से जुड़े एससी/एसटी प्रकरण की खबर
उनकी प्रमुख खबरों में एससी/एसटी से जुड़े एक कथित फर्जी मामले में पांच मासूमों से संबंधित प्रकरण भी शामिल रहा। इस तरह के संवेदनशील मामलों में पत्रकारिता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसमें कानूनी, सामाजिक और मानवीय तीनों पक्ष जुड़े होते हैं।
ऐसी खबरों को सामने लाते समय तथ्यों की पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष रखना आवश्यक होता है। प्रद्युम्न तिवारी ने इस प्रकरण को जनचर्चा का विषय बनाया और मामले से जुड़े लोगों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया।
‘बुंदेलखंड खंड की आवाज’ के संपादक
वर्तमान समय में प्रद्युम्न तिवारी ‘बुंदेलखंड खंड की आवाज’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक हैं। संपादक के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। समाचार चयन, विषयों की प्राथमिकता, भाषा, तथ्यपरकता और जनसरोकारों को स्थान देना भी उनके कार्य का हिस्सा है।
‘बुंदेलखंड खंड की आवाज’ के माध्यम से क्षेत्रीय मुद्दों को व्यापक मंच देने की उनकी कोशिश स्थानीय पत्रकारिता को एक अलग पहचान देने की दिशा में देखी जा सकती है।
उनका कार्यक्षेत्र केवल एक गांव या कस्बे तक सीमित न रहकर सम्पूर्ण भारत वर्ष तक फैला हुआ है। हालांकि उनकी पत्रकारिता का मूल जुड़ाव ललितपुर और बुंदेलखंड की जमीन से बना हुआ है।
पत्रकारिता में मिली-जुली प्रतिक्रिया को स्वीकार करते हैं
किसी भी पत्रकार के लिए समाज की प्रतिक्रिया हमेशा एक जैसी नहीं होती। प्रद्युम्न तिवारी को भी अपने पत्रकारिता जीवन में लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं।
जनहित के मुद्दे उठाने पर जहां पीड़ित और जरूरतमंद लोग पत्रकार के साथ खड़े होते हैं, वहीं किसी समस्या या व्यवस्था की कमियों को सामने लाने पर असहमति भी सामने आ सकती है।
प्रद्युम्न तिवारी का मानना है कि पत्रकार का काम हर व्यक्ति को खुश करना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर समाज के सामने वास्तविक मुद्दे रखना है। आलोचना भी पत्रकारिता का एक हिस्सा है और इससे पत्रकार को अपनी कार्यशैली को और बेहतर करने का अवसर मिलता है।
भविष्य की प्राथमिकताएं
भविष्य को लेकर प्रद्युम्न तिवारी की प्राथमिकताओं में क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उनकी प्रमुख योजनाओं में देवगढ़-बेतवा पर पुल के निर्माण की मांग को आगे बढ़ाना शामिल है।
उनका मानना है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला होती है। यदि देवगढ़-बेतवा क्षेत्र में पुल का निर्माण होता है तो आवागमन के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को भी लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा उनकी भविष्य की योजनाओं में जयपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य की स्थापना का मुद्दा भी शामिल है। उनका उद्देश्य है कि ग्रामीण और जरूरतमंद आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवाज उठाई जाए।
पत्रकारिता का सफर अभी जारी है
वर्ष 2014 में ‘दैनिक जनप्रिय’ से शुरू हुआ प्रद्युम्न तिवारी का पत्रकारिता सफर अब संपादक के रूप में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में उनके सामने अनेक चुनौतियां आईं, लेकिन स्थानीय समस्याओं को उठाने का उनका उद्देश्य लगातार बना रहा।
देवगढ़ से निकलकर ललितपुर और बुंदेलखंड के विभिन्न जनसरोकारों तक पहुंची उनकी पत्रकारिता की यात्रा यह बताती है कि स्थानीय पत्रकारिता का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। डिजिटल दौर में समाचारों के माध्यम भले बदल गए हों, लेकिन आम आदमी की समस्याएं आज भी वही हैं—बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ।
ऐसे में स्थानीय पत्रकार की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
निष्कर्ष
प्रद्युम्न तिवारी की पत्रकारिता की पहचान जनसरोकार और जनसेवा की सोच से जुड़ी दिखाई देती है। देवगढ़ की धरती से शुरू हुआ उनका पत्रकारिता सफर जाखलौन, देवगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उठाते हुए आगे बढ़ा। 33 केवी विद्युत सब स्टेशन की मांग, देवगढ़ की पेयजल समस्या, जाखलौन को नगर पंचायत बनाने की मांग, गरीबों के आवास, शहरिया आदिवासी समुदाय की समस्याओं और पुलिस विभाग से जुड़े मामलों को प्रमुखता देना उनकी पत्रकारिता के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है।
उनकी अपनी दृष्टि में पत्रकारिता का उद्देश्य स्पष्ट है—“जनसेवा करना और उन समस्याओं को उठाना, जिनसे आम आदमी ग्रसित है।”
यही विचार उनके पत्रकारिता जीवन की सबसे महत्वपूर्ण पहचान बनता है। आने वाले समय में देवगढ़-बेतवा पुल और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता क्षेत्रीय विकास की बहस को आगे बढ़ा सकती है।
देवगढ़ से शुरू हुई यह पत्रकारिता यात्रा अब बुंदेलखंड की आवाज को व्यापक मंच देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
प्रोफाइल: प्रद्युम्न तिवारी
जन्म: 6 फरवरी 1988, देवगढ़, ललितपुर
शिक्षा: एमए पत्रकारिता
पत्रकारिता प्रारंभ: 2014
पहला संस्थान: दैनिक जनप्रिय
वर्तमान संस्थान: बुंदेलखंड खंड की आवाज
पद: संपादक
मुख्य उद्देश्य: जनसेवा एवं जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाना

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